शनिवार, 29 जनवरी 2011

लाद चलेगा बंजारा - नज़ीर अकबराबादी

टुक हिर्स ओ हवस को छोड़ मियां मत देस-विदेस फिरे मारा,
कज्जाक अजल का लूटे है, दिन-रात बजाकर नक्कारा,
क्या बधिया, भैसा, बैल, शुतुर, क्या गोने पल्ला सर भारा,
क्या गेहूं, चावल, मोंठ, मटर, क्या आग-धुवा और अंगारा,
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा।

गर तू है लक्खी बंजारा और खेप भी तेरी भारी है,
एक गाफिल, तुझसे भी चतुरा, इक और बड़ा व्योपारी है,
क्या शक्कर-मिस्री, कन्द, गरी, क्या सांभर मीठी खारी है,
क्या दाख मुनक्के सोंठ, मिर्च, क्या केसर, लोंग, सुपारी है,
सब ठाठ पड़ा, रह जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा।

तू बधिया लावे बैल भरे, जो पूरब पश्छिम जावेगा,
या सूद बढ़ाकर लावेगा, या टोटा-घाटा पावेगा,
कज्जाक अजल का रस्ते में, जब भाला मार गिरावेगा,
धन-दौलत, नाती, पोता क्या, इक कुनबा काम न आवेगा,
सब ठाठ पड़ा रहा जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा।

हर मंजिल में अब साथ तेरे, ये जितना डेरा-डांडा है,
जर, दाम, दिरम का भांडा है, बन्दूक, सिपर और खांडा है,
जब नायक तन का निकल गया, जो मुल्कों-मुल्कों हांडा है,
फिर हांडा है ना भांडा है, ना हलवा है ना भांडा है,
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा।

जब चलते-चलते रस्ते में, ये गोन तेरी रह जावेगी,
इक बधिया तेरी मिट्रटी पर, फिर घास न चरने आवेगी,
ये खेप जो तूने लादी है, सब हिस्सों में बट जावेगी,
घी पूत, जंवाई, पोता क्या, बंजारिन पास न आवेगी,
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा

ये धूम-धड़क्का साथ लिये, क्यों फिरता है जंगल-जंगल,
इक तिनका साथ न जावेगा, मौकूफ हुआ जब अन्न ओर जल,
घर-बार अटारी, चौपारी, क्या खासा, तनसुख है मसलन,
क्या चिलमन, पर्दे, फर्श नये, क्या लाल पलंग और रंगमहल,
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा।

क्यों जी पर बोझ उठाता है, इन गोनों भारी-भारी के,
जब मौत का डेरा आन पड़ा, तब दूने हैं व्योपारी है,
क्या साज जड़ाऊ, जर, जेवर, क्या गोटे थान कनारी के,
क्या घोड़े जीन सुनहरी के, क्या हाथी लाल अंबारी के,
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा, जब लाद चलेगा बंजारा।

हर आन नफा ओर टोटे हैं, क्यों मरता फिरता है बन-बन,
टुक गाफिल दिल में सोच जरा है साथ लगा तेरे दुश्मन,
क्या लौंडी, बांदी, दाई, दवा, क्या बन्दा, चेला नेक चलन,
क्या मंदिर, मस्जिद, लाल कुंआ क्या खेती-बाड़ी फूलचमन,
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा, जब छोड़ चलेगा बंजारा 

2 टिप्पणियाँ:

यहां 27 जून 2013 को 4:33 pm बजे, Blogger Ashish Bihani ने कहा…

Thank you very much for this. I love your blog ! Keep bringing this great stuff to us.

 
यहां 27 जून 2013 को 10:58 pm बजे, Blogger Aditya Agrawal ने कहा…

Thanks Ashish ji. Nice to see a fellow individual who loves Hindi Poetry.

 

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